किसी कविता सी गुजरती है ‘मसान’

मृत्युंजय प्रभाकर तू किसी रेल सी गुजरती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां फिल्म ‘मसान’ का कनेक्टिंग पॉइंट हैं, जो बदलते दृश्यों और कथानक […]

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किसका आत्म किसकी कथा: आत्मकथा

मृत्युंजय प्रभाकर जीवन को समग्रता में देखने-सुनने की कोशिशें नई नहीं हैं. कई बार यह किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा किया जाता है तो कई बार व्यक्ति खुद ही एक […]

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