हमने भी ‘हैदर’ देखी है

मृत्युंजय प्रभाकर बचपन से मुझे एक स्वप्न परेशान करता रहा है. मैं कहीं जा रहा हूँ और अचानक से मेरे पीछे कोई भूत पड़ जाता है. मैं जान बचाने के […]

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रंग रसिया : फिल्मी पर्दे को कैनवस में बदलता सिनेमा

  मृत्युंजय प्रभाकर ‘रंग रसिया’ जब से देखी थी तब से मेरे भीतर एक खास तरह की बेचैनी घर कर गई थी। मुझे इस फिल्म पर लिखना ही था। इस बीच कई […]

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